सोमवार, 3 अप्रैल 2017

अनोखा जन्मदिन- बाल कहानी


परसों मिंकु बंदर का जन्मदिन है। मिंकु ने क ई महीने पूर्व ही तैयारी करने लग गया था। मिंकु बंदर अपना जन्मदिन इस तरह से मनाना चाहता था कि अभी जंगलवासी याद रखें। मिंकु अपने जन्मदिन की तैयारी गुपचुप तरीके से कर रहा था जिससे की किसी को पता न चले।
           आज मिंकु का अपने दोस्तों को निमंत्रण पत्र बाँट रहा था।
"मिंकु, परसों तो तुम्हारा जन्मदिन है",- चिंटू कोयल ने कहा-" और तुमने अभी तक कोई तैयारी नहीं की?"
"तैयारी तो मैंने कर रखी है", -मिंकु बंदर ने मुस्कुराते हुए कहा- " इस बार तो मेरा जन्मदिन सबसे अनोखा होगा।"
जंबु जिराफ ने कहा- "तो हमें उपहार भी अनोखे लाने होंगे?"
"नहीं", - मिंकु ने उत्तर दिया,-" इस बार तुम कोई उपहार नहीं लाओगे। इस बार तो मैं आपको उपहार दूँगा।"
"क्या?"- सभी ने आश्चर्य से कहा।
" तब तो वास्तव में तुम्हारा जन्मदिन अनोखा है।"- चिंटु कोयल ने कहा।
               मिंकु तो निमंत्रण पत्र बाँट कर चला गया। पर सभी दोस्त मिंकु के अनोखे जन्मदिन का बेसब्री से इंतजार करने लगे।
              आज मिंकु बंदर का जन्मदिन है। सभी दोस्त मिंकु के कहे अनुसार कोई उपहार लेकर नहीं आये।
  मिंकु के घर पर कोई तैयारी नहीं दिखाई दे रही थी। सभी दोस्त आश्चर्यचकित थे कि बिना तैयारी एवं सजावट के मिंकु किस तरह का जन्मदिन मना रहा है।
        "मिंकु तुम तो कह रहे थे कि तुम्हारा जन्मदिन सबसे अनोखा होगा, पर यहाँ तो कुछ भी तैयारी नहीं दिखाई दे रही।"- सभी दोस्तों ने पूछा।
     पिलु कुत्ते ने पूछा- " मिंकु जल्दी बताओ तुम किस तरह का अनोखा जन्मदिन मना रहे हो?"
     मिंकु ने मुस्कुराते हुए कहा- "दोस्तों, आज मेरा जन्मदिन है। मैं आज आपसे कोई उपहार नहीं ले रहा, बल्कि आप सभी को एक अनोखा उपहार दे रहा हूँ। क्या आप मेरे दिये गये उपहार को सुरक्षित रखोगे?"
  "हाँ!"- सभी दोस्तों ने एक साथ कहा-
  " तो आओ मेरे साथ"- मिंकु ने कहा - "जहाँ अनोखे उपहार आप सभी का इंतजार कर रहे हैं।"
      सभी दोस्त मिंकु के घर के पीछे बनी बगिया में पहुँचे। बगिया में बहुत से रंग-बिरंगे फूल खिले थे। क ई क्यारियों में आम, जामुन, बरगद, सेमल, नीम आदि के पौधे लगे थे।
"यहाँ पर कौनसे अनोखे उपहार हैं?"- अभी दोस्तों ने इधर-उधर देखते हुए कहा।
" इन क्यारियों में लगे पौधे ही अनोखे उपहार हैं।"
"वो कैसे?"- सभी दोस्तों ने एक साथ पूछा।
मिंकु ने उत्तर दिया- " दोस्तों, हमारे जंगल से दिन प्रतिदिन पेङ-पौधे कम होते जा रहें हैं। जिसके कारण बरसात कम होने से पानी की कमी आ रही है। इस जन्मदिन पर मैंने निर्णय लिया है कि हम सभी पौधे लगाकर अपने जंगल को हरा-भरा बनाएँगे।"
  "तुम सही कह रहे हो।"- सभी दोस्तों ने मिंकु की बात का समर्थन किया।
  " इसलिए मैं आप सभी को उपहार में एक-एक पौधा दे रहा हूँ। जिसे आप लगाओगे और उसकी रक्षा भी करोगे।"- मिंकु बंदर ने कहा।
        "वाह! मिंकु।"- जंबु जिराफ ने कहा- " तुम्हारा जन्मदिन तो वास्तव में सबसे अनिखा है।
      टिंकु चिङिया ने कहा- "इस तरह हम जन्मदिन भी मना लेंगे तथा पर्यावरण की सुरक्षा भी कर लेंगे।"
  पिलु कुत्ते ने कहा- "हम सभी भविष्य में अपना जन्मदिन इसी तरह मनाएँगे।"
"तो आओ दोस्तों", -मिंकु बंदर ने कहा- " सभी एक-एक पौधा उठा लो और इसे जंगल में लगाकर आऐं।"
   सभी ने अपनी-अपनी पसंद के पौधे उठा लिए।
"मिंकु, तुम्हें जन्मदिन की बधाई हो।"- सभी ने एक साथ कहा तो मिंकु भी मुस्कुरा उठा।
सभी दोस्त मिंकु के साथ अपना-अपना अनोखा उपहार उठाए चल दिए।
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बाल वाटिका
(भीलवाङा, राजस्थान)
दिसंबर- 2010

2 टिप्‍पणियां:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल गुरूवार (06-04-2017) को

"सबसे दुखी किसान" (चर्चा अंक-2615)
पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
विक्रमी सम्वत् 2074 की
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

Jyoti Dehliwal ने कहा…

बढ़िया कहानी।