रविवार, 10 मार्च 2019

अगाई माता- ओरिया, माउंट आबू

रविवार का दिन अवकाश का दिन होता है। ये दिन या तो घर की साफ- सफाई में बीतता है या फिर कहीं घूमने में। रविवार 3.03.2019 को मैं और साथी मनोज कुमार भी घूमने निकले।
माउंट आबू का एक गांव है 'ओरिया'। वहाँ के विद्यालय में मनोज जी शिक्षक हैं। विद्यालय बच्चों का एक छोटा सा टूर बना घूमने का तो हमें भी बुला लिया। हमारे बाकी शिक्षक मित्र घर गये हुए थे। हम दोनों खाली थे, तो ओरिया चले गये।


            हम लगभग 11 AM ओरिया पहुंचे। कुछ समय बाद बच्चे भी आ गये। वे संख्या में आठ थे और दो हम, कुल दस।'
                 'गुरुशिखर खगोल भौतिक विज्ञान वैद्यशाला' के सामने से होता हुआ एक रास्‍ता जाता है 'अगाई माता मंदिर'। हमारा आज का कार्यक्रम भी इसी मंदिर का था। जंगल और पहाड़ियों के बीच से निकलता कच्चा-पक्का, अनगढ रास्ता कई छोटे-बड़े घूमाव के बाद हमें मंदिर ले गया।
जंगल का रास्ता
रास्ते का सफर हाल ज्यादा नहीं है, लगभग तीस-चालीस मिनट का सफर होगा, लेकिन रास्ते की हल्की-हल्की चढाई अवश्य परेशान करती है। जंगल के अंदर झाड़ियों के बीच से कुछ पगडंडियां सी निकलती दिखाई देती हैं, मैं जिन्हें देखकर अक्सर सोचता रहता हूँ के छोटे-छोटे रास्ते कौन बनाता है। तब एक बच्चे ने समाधान किया "सर, रास्ते भालू बनाते हैं। भालू अक्सर यहाँ घूमते हैं। वे इन रास्तों से जंगल में चले जाते हैं।"
                        रास्ते में एक जगह जमीन के अंदर एक गड्डा दिखाई दिया तो बच्चों ने बताया की भालू 'चिंटी, मकोड़े' आदि के बिल को खोदकर उ‌नको खा जाता है। यह किसी चिंटी आदि का बिल होगा जिसे भालू ने खोदा है।
भालू की करामात


                  बच्चों का साथ तो रास्ते को और भी मनोरंजन बना देता है, बच्चे स्कूल की चर्चा के साथ-साथ एक-दूसरे की शिकायतें भी करते चलते हैं। कुछ बच्चे एक दूसरे के किस्से भी सूना देते हैं।
एक पहाड़ी पर बना 'अगाई माता मंदिर' दर्शनीय है। हालांकि पहाड़ी ज्यादा ऊंची नहीं है, लेकिन वह पहाड़ी अपनी श्रृंखला की अंतिम‌ पहाड़ी है। इसी अंतिम पहाड़ी पर यह मंदिर स्थित है। उसके चारों तरफ और भी काफी छोटी-बड़ी पहाडियां नजर आती हैं। यहाँ से गुरु शिखर नजर आता है और माउंट आबू की तरफ के कुछ गांव भी।
                'अगाई माता' यहाँ के राजपूत समाज की देवी है। इसका इतिहास क्या है, यह तो खैर पता नहीं चला और बच्चों को भी इस विषय में कोई जानकारी नहीं। एक बात यह पता चली की पहले यह मंदिर छोटा सा था लकिन कुछ असामाजिक तत्वों ने इसका गुबंद तोड़ दिया और मंदिर को भी क्षति पहुंचाई। उसके बाद गांव वालों ने सहयोग से इस मंदिर का पुन: निर्माण किया। वर्तमान मंदिर भव्य और बड़ा है। इसी के साथ छोटा मंदिर में अवस्थित है।
अगाई माता मंदिर
            हम मंदिर की पहाड़ी पर घूमते कुछ देर घूमते रहे और फोटोग्राफी करते रहे। विभिन्न कोणों से फोटोग्राफी करने बाद हमने वापसी का रूख किया।
            वापसी में आते वक्त एक छोटा सा शिव मंदिर भी दिखाई दिया तो बच्चे उस मंदिर में भी ले गये। यह मंदिर भी रास्ते से हटकर एक पहाड़ियों के नीचे पानी के बहाव वाली जगह पर है।
         ‌वहाँ एक फलदार पौधा दिखाई दिया बच्चों ने बताया यह 'झमीरा' है। यह संतरे की तरह का एक खट्टा फल है।
झमीरा नामक फल

खेत, तालाब और पहाड़
मंदिर, पहाड़ आदि देखने बाद खेतों में कुछ देर घूमने बाद वापसी की।
हम तीन बजे के लगभग वापस घर पहुंचे। आज की यात्रा छोटी थी लेकिन अच्छी और मनोरंजन रही।


हम भी अच्छे लगते हैं।



1 टिप्पणी:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल सोमवार (11-03-2019) को "लोकसभा के चुनाव घोषि‍त हो गए " (चर्चा अंक-3270) (चर्चा अंक-3264) पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'