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मंगलवार, 16 सितंबर 2014

जीवन



जीवन है सुख दुख का दरिया
लहरं जिसमें आती जाती,
नांव  किनारे वही है लगती
जो लहरों से है टकराती।


फूल सा है यह जीवन
खिलता और मुरझाता,
सार्थक करता वही जीवन को
जो सुकर्म सुगंध है बिखराता।


प्रेम पवित्र से ही जीवन
मधुमय बन जाता है,
सत्य,अहिंसा और धर्म से
जीवन श्रृंगारित हो जाता है।
  
जीवन का अनवरत क्रम
  
हार-जीत और खोना-पाना,
परहित उत्सर्ग है मानवता
सुख-दुख में सबका साथ निभाना।


जीवन के महासमर में
संघर्ष हि पार लगाता है,
परिश्रम और धैर्य से
मानव विजयी बन जाता है।।

   

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